Wednesday, December 19, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 12


शेखू ----

हर सच पे ही लाहौल1 पढ़ा करता है शेखू ,
हर झूट दलीलों से गढ़ा करता है शेखू.

चाट करता है बेवाओं, यतीमों की अमानत,
कुफ़्फ़ारा2 दुआओं से, अदा करता है शेखू.

देता है सबक़ सब को, क़िनाअत3की सब्र की.
ख़ुद मुर्ग़ ए मुसल्लम पे, चढ़ा करता है शेखू.

दो बीवी निंभाता है, शरीअत4 के तहत वह,
दोनों को फ़क़त निस्फ़,5 अता करता है शेखू.

हर शाम मुरीदों को चराता है इल्मे-ताक़,
हर सुब्ह इल्मे-ख़ाक पढ़ा करता है शेखू.

बख्शेगी इसे दुन्या, न बख्शेगा ख़ुदा ही,
'मुंकिर' ये ख़ताओं पे ख़ता करता है शेखू.
१-धिक्कार २- प्रायश्चित ३-संतोष ४-धर्म-विधान ५-आधा

شیخوووو 

ہر سچ پہ ہی لاحول، پڑھا کرتا ہے شیخو 
ہر جھوٹ دلیلوں سے، گڑھا کرتا ہے  شیخو٠ 

چٹ کرتا ہے بیواؤں ، یتیموں کی امانت 
کفّارہ دعاؤں سے، ادا کرتا ہے  شیخو٠ 

دیتا ہے سبق سب کو، قناعت کی رضا کی 
خود مرغ مسلّم پہ، چڑھا کرتا ہے  شیخو ٠ 

دو بیوی نبھاتا ہے ، شریعت کے تحت وہ 
دونوں کو فقط نصف، دیا کرتا ہے  شیخو٠ 

ہر شام مریدوں کو،  چراتا ہے حدیثیں 
خود جنکو شب و روز، گڑھا کرتا ہے شیخو ٠ 

بخشیگی اسے دنیا ، نہ بخشےگا خدا ہی 
منکرجی ! خطاؤں پہ خطا کرتا ہے  شیخو ٠ 

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