Monday, December 17, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 10


फ़क़ीर का ज़मीर

कम ब.ख्त इक फ़क़ीर कल दफ़तर में आ घुसा,
बोला कि बेटा जीता रहे, लिख दे ख़त मेरा.
कागज़, कलम था हाथ में, बढ़ कर थमा दिया,
मैं ने भी कारे-ख़ैर यह हलके में ले लिया.
कहने लगा कि जोरू को लिख दे मेरा सलाम,
लिख दे कि आज कल ज़रा ढीला है अपना काम.
माहे-रवाँ में लिख दे कि गर्दिश मेहरवाँ, 
इस वजह छ; हज़ार ही रपया है कुल वाँ.
अगले महीने काफ़ी बचत की उम्मीद है,
हिंदू की है दीवाली, मुसलमां की ईद है.

मैं ने कहा कि ये लो, बुरे हाल लिख दिया,
कहने लगा कि, "बेटा अब हो जाए कुछ भला"
यह सुन के सर फिरा तो तवाज़ुन1 बिगड़ गया,
मुंह से निकल गया कि तेरी --------------
१-संतुलन

فقیر کا ضمیر 
کمبخت ، اک فقیر کل دفتر میں آ گھسا 
بولا کہ بیٹا جیتا رہے ، لکھ دے خط مرا 
کاغزقلم مجھے، بسماجت تھما دیا 
میں نے نیے ثواب کا ، یہ قصد جو کیا 
کہنے لگا کہ جورو کو، لکھ دے مرا سلام 
لکھ دے کہ آج کل ذرا، ڈھیلا ہے اپنا کام 
ماہ رواں میں لکھ دے، کہ گردش ہے مہرباں 
اس وجہ صرف ساٹھ سو روپیہ ہیں کل رواں ٠ 
اگلے مہینے کافی بچت کی امید ہے 
ہندو کی دیوالی ہے ، مسلماں کی عید ہے ٠ 
میں نے کہا ، یہ لو کہ برے حال لکھ دیا 
کہنے لگا کہ بھیّہ جی! ہو جاۓ کچھ بھلا ٠ 
یہ سن کے سر پھرا ، تو توازن بگڑ گیا 
منہ سے نکل گیا کہ تیری - - - - - - ٠ 

Sunday, December 16, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 9


टक्कर 

था तबअ1 आज़ाद दहकाँ2, शेख़ ए बातिल3 का था वाज़4,
मैं उसे सौ ऊँट दूंगा, जो पढ़े सौ दिन नमाज़.
पा के लालच ऊँट का, दहकाँ वह राज़ी हो गया,
गोया अगले रोज़ से, पाजी नमाज़ी हो गया.

सौ दिनों के वाद आए शेख़ जब उसके यहाँ,
बोले बेटा पास मेरे ऊँट और घोडे कहाँ,
तुझको कर देना नमाज़ी, बस मुझे दरकार था,
राह में मस्जिद के बस, तू ही खटकता ख़ार था.
शेख़ की वादा ख़िलाफ़ी पर था उसका ये जवाब,
बे वज़ू5 के मैंने भी, टक्कर लगाए हैं जनाब.

1 स्वतंत्र स्वभाव 2 किसान 3 झूठा मोलवी 4 संबोधन 5 शरीर शुद्ध करना 

ٹکّر 

تھا طبع آزاد دہقان ، شیخ باطل کا تھا واعظ 
"میں اسے سو اونٹ دونگا ، جو پڑھے سو دن نماز"  
کر کے لالچ اونٹوں کا، وہ شخص راضی ہو گیا
گویہ اگلے دن سے، وہ پاجی نمازی ہو گیا ٠

  سو دنوں کے بعد آئے، شیخ جب اسکے یہاں 
بولے بیٹا پاس میرے، اونٹ اور گھوڑے کہاں ٠ 
تجھ کو کر دینا نمازی، بس مجھے درکار تھا 
راہ میں مسجد کے اک، تو ہی کھٹکتا خار تھا ٠ 
شیخ کی وعدہ خلافی پر، یہ اسکا تھا جواب  
بے وضو کے میں نے بھی ، ٹکّر لگاۓ ہیں جناب ٠ 

Saturday, December 15, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 8


पंडितो-मुल्ला -----

पंडितो-मुल्ला दो गहरे दोस्त थे इक चाल में,
खूब बनती, खूब छनती दोनों की हर हाल में,

एक दिन मुल्ला ये बोला, सुन कि ऐ पंडित महान!
बाँधता तू है ग़लत, पेशाब में अपने ये कान ?

सुन के पंडित ने कहा और वज़ू तेरा मियाँ?
गंध करता है कहाँ से ? साफ़ करता है कहाँ ?

तेरे मेरे आस्थाओं में ज़रा सा फ़र्क़ है,
मेरी कश्ती नर्क में है, तेरा बेडा ग़र्क़ है.

نہلے پر دہلا 

پنڈت و مللہ دو باہم، دوست تھے اک چال میں
خوب بنتی ، خوب چھنتی ، دونوں کی ہر حال میں ٠ 
ایک دن مللہ نے پوچھا ، سن کہ ائے پنڈت مہان
جاتا ہے پیشاب کو ، کیوں باندھتا ہے اپنے کان ؟
سن کے پنڈت نے کہا ، جیسے وضو تیرا میاں 
گندہ کرتا ہے کہاں سے اور دھوتا ہے کہاں ٠ 
*
ایک دن پنڈت نے چھیڑا، مللہ ائے قلب سیاہ 
جب ڈکاریں آتی ہیں ، علحمد کی لیتا ہے تھاہ 
پاس تیرے ہر گھڑی، اوسر کی ہوتی ہے دعا     
ہے کوئی ایسی دعا ، جو بعد ہو خارج ریاح 
بولا ملا ہاں ! ہے نہ ائے کاشی نریش 
ایسے موقعہ پر پڑھا کرتا ہوں میںجے جے گنیش ٠ 

Friday, December 14, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 7


भतीजे के नाम 

मत आना इन के जाल में ऐ मेरे भतीजे,
अ.क्साम ए ख़ुदा सब हैं क़यासों के नतीजे.

जो बात तुझे लगती हो फ़ितरत के मुख़ालिफ़,
उस बात पे हरगिज़ न मेरे लाल पसीजे.

जालों को बिछाए हैं ये रिश्तों के शिकारी,
बहनें हों कि भाई हों कि साले हों कि जीजे.

मिट्टी को निजी चाक के तू  कर दे हवाले,
माँ बाप की मुट्ठी तो रहेगी तुझे मींजे.

दिखला दे ज़माने को तेरा रंग ही जुदा है,
टक्कर में तेरे कोई भी दूजे हैं न तीजे.

अक़साम =क़िस्में

بھتیجے کے نام 

مت آنا انکے جال میں ایے میرے بھتیجے 
اقسام ے خدا ہیں یہ  قیاسوں کے نتیجے٠  

جو بات تجھے لگتی ہو فطرت کے مخالف
اس بات پہ  ہرگز نہ میرے لعل پسیجے٠  

جالوں کو بچھاۓ ہیں یہ رشتوں کے شکاری 
بہنیں ہوں کہ بھائی ہوں کہ سالے ہوں کہ جیجے٠  

مٹتی کو نجی چاک کے تو کر دے حوالے
ماں باپ کی مٹھی تو رہیگی تجھے مینجے٠  

دکھلا دے زمانے کو تیرا رنگ ہی جدا ہے 
ٹکّر میں تیرے کوئی بھی دوجے ہیں نہ تیجے٠  

Thursday, December 13, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 6


ध्यान का ज्ञान 

इक ध्यानी ध्यान में था, डूबा विधान में था,
इच्छा थी उसको पाऊँ, फिर दुनिया को दिखाऊँ.
लेकिन बड़ी थी मुश्किल, होना ये ग़र्क ए कामिल. 
कोई विचार आता, प्रयत्न टूट जाता.
उसने गुरु बनाया, जो उसके काम आया.

गुरुवर ने दक्षिना ली, भंग उसको फिर पिला दी.
उसको नशा जो आया, धीरे से खिलखिलाया.
बोला गुरु, मिला कुछ ? "हाँ और भी पिला कुछ"
जब पूरी चढ़ गई भंग, शागिर्द रह गया दंग.
प्रसाद गुड का खाता, लड्डू के मज़े पाता.

उठ कर वह नाच जाता, फिर तालियाँ बजाता.
जिसको वो ध्यान करता, वह सामने गुज़रता.
भगवान् पा चुका था, मुक्ति कमा चुका था.
ग़र्क ए कामिल -पूरी तरह डूबना 

 دھیان کا گیان 

اک گیانی گیان میں تھا ، ڈوبا ندان میں تھا 
اچھا تھی اسکو پاؤں ، پھر دنیا کو دکھاؤں 

لیکن بڑی تھی مشکل ، ہونا یہ غرق کامل 
کوئی وچار آتا ، پریتن ٹوٹ جاتا 

اسنے گرو بنایا ، جو اسکے کام آیا 
گرو ور نے دکچھنا لی ، بھنگ اسکو پھر پلا دی 

اسکو نشہ جو آیا ، دھیرے سے کھلکھلایا
جب پوری چڑھ گئی بھنگ ، شاگرد رہ گیا دنگ 

پرساد گڑ کا کھاتا  ، لدڈو کا مزہ پاتا
اٹھ کر وہ ناچ جاتا ، پھر تالیاں بجاتا 

جسکو وہ دھیان کرتا ، وہ سامنے گزرتا 
بھگوان پا چکا تھا ، مکتی کما چکا تھا٠ 

Wednesday, December 12, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 5


बैटिंग ----

क्या बात है, अकेले ही 'मुंकिर' खड़े हो तुम?
लगता है इस समाज से कस के लड़े हो तुम.

तफ़सीर1,तर्जुमा2 कि हो तारीख, चट चुके,
जितने ज़मीं से निकले हो उतने गडे़ हो तुम.

इब्लीस3 की तरह ही, ख़ुदी के नशे में हो,
आदम की वल्दियत है, ये किस पे पड़े हो तुम?

मज़हब हैं ग्यारह, बारह किसी पर तो पसीजो,
दिल नर्म है, दिमाग़ से कितने कड़े हो तुम.

कैच

लोगो ये कायनात4 तग़य्युर पजीर5 है,
सदियों पुरानी रस्मे-कुहन6 पर अडे़ हो तुम.

ख़ुद अपनी रहनुमाई के क़ाबिल नहीं हुए?
कब तक रहोगे गोद में? जल्दी बड़े हो तुम.

१-ब्याख्या २-अनुवाद ३-बड़ा शैतान ४-ब्रम्हांड ५-परिवर्तन शील ६-पुराणी रस्में

بیٹنگ

کیا بات ہے ، اکیلے ہی 'منکر' کھڑے ہو تم
لگتا ہے اس سماج سے ، کس کے لڑے ہو تُم٠ 
تفسیر و ترجمہ کہ ہو تاریخ ، چٹ چکے 
جتنے زمیں سے نکلے ہو ، اتنے گڑے ہو تم ٠ 
ابلیس کی طرح ہی ، خودی کے نشے میں ہو 
آدم کی ولدیت مگر ، کس پہ پڑے ہو تم ٠ 
مذہب ہیں چار پانچ ، کسی پر پسیج جاؤ 
دل نرم ہے ، دماغ کے کتنے کڑے ہو تم ٠ 

اور کیچ 

لوگو ! یہ کاینات تغیّر پذیر ہے 
صدیوں پرانی رسم کہن پر اڑے ہو تم 
خود اپنی رہنمائی کے قابل نہیں ہوئے ؟
کب رہوگے گود میں ،جلدی بڑے ہو تم ٠ 

Tuesday, December 11, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 4


दोहा-तीहा-चौहा
दोहा

 तुलसी बाबा की कथा, है धारा प्रवाह, 
राम लखन के काल के, जैसे होएँ गवाह. 

तीहा

हे दो मन की बालिके ! देहे पर दे ध्यान,
चलत, फिरत, डोलत तुझे, पल पल होत थकान,
पर मुँह ढोवे न थके, तन यह बैल समान.

चौहा

सात नवाँ तिरसठ भया, तीन औ छ चुचलाएँ,
तीन नवाँ छत्तीस हुआ, तीन औ छ टकराएँ,
छत्तीस का यह आकड़ा, अकड़े बीच बजार,
तिरसठ की है आकडी , गलचुम्मी कर जाएँ.

دوہا  --تیہا ---چوہا 

دوہا

تلسی بابا کی کتھا، ہے دھارا پرواہ 
رام لکھن کے کال کے، جیسے ہویں گواہ٠  

تیہا

ہے دو من کی بالیکے ! دے دیہے پر دھیان 
چلت پھرت ڈولت تجھے پل پل ہوت تکان 
پر منہ ڈھووت نہ تھکے ، تن یہ دھول سمان٠  

چوہا
سات نواں ترسٹھ بھیا ، تین اور چھہ چچلأیں 
تین نواں چھتیس ہوا ، تین اور چھہ ٹکرایں 
 چھتیس کا یہ آکڑا ، اکڑیں بیچ بزار 
ترسٹھ کی ہے آکڑی ، گلچممی کر جاین٠