Sunday, December 25, 2016

Junbishen 782


Rubaiyan

चल दिए दबे क़दम किधर , शहिद तुम,
साथ में लिए हुए ये मुल्हिद तुम , 
पी ली उसकी या पिला दिया अपनी मय ,
था तुम्हारा नक्काद ये और नाक़िद तुम .

چل دے دبے قدم کدھر زاہد تم 
ساتھ میں لئے ہوئے یہ ملحد تم 
پی لی اسکی یا پلا دیا اپنی مے 
تھا تمہارا یہ نققاد، اور ناقد تم ٠   


जब गुज़रे हवादिस तो तलाशे है दिमाग, 
तब मय की परी हमको दिखाती चराग़, 
रुक जाती है वजूद में बपा जंग, 
फूल बन कर खिल जाते हैं दिल के सब दाग 

جب گزرے حوادث کو تلاشے یہ دماغ 
تب  مے کی پری ہم کو دکھاۓ ہے چراغ 
رک جاتی ہے وجود میں بپا جنگ 
پھول بن کر کھل جاتے ہیں دل کے سب داغ ٠ 


औलादें बड़ी हो गईं, अब उंगली छुडाएं , 
हमने जो पढाया है इन्हें, वो हमको पढ़ें, 
हो जाएँ अलग इनकी नई दुनया से, 
माँ बाप बचा कर रख्खें, अपना खाएँ. 

اولادیں بڑی ہو گئیں ، اب انگلی چھڑا یں 
ہم نے جو پڑھھایا انہیں، وہ ہم کو پڑھا یں 
ہو جایں الگ انکی نئی دنیا سے 
ماں باپ بچا ہر رکھیں ، اپنا کھا یں٠  

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Friday, December 16, 2016

Junbishen 781


रुबाईयाँ 
कहते हैं कि मुनकिर कोई रिश्ता ढूंढो, 
बेटी के लिए कोई फ़रिश्ता ढूंढो, 
माँ   बाप के मेयर पे आएं पैगाम, 
अब कौन कहे , अपना गुज़िश्ता ढूंढो. 


کہتے ہیں کہ منکر کوئی رشتہ ڈھونڈھو 
بیٹی کے لئے کوئی فرشتہ ڈھونڈھو 
ماں باپ کے اعمال پہ آہیں پیغام 
اب کون کہے، اپنا گزشتہ ڈھونڈھو ٠ 



लगता है कि जैसे हो पराया ईमान, 
या आबा ओ अजदाद से पाया ईमान , 
या उसने डराया धमकाया इतना , 
वह खौफ के मारे ले आया ईमान. 

لگتا ہے کہ جیسے ہو پریا ایمان 
یا باپ سے دادا سے، ہو پایا ایمان 
یا اسنے ڈرایا دھمکایا اتنا 
وہ خوف کے مارے لے آیا ایمان ٠ 



चाहे जिसे इज्ज़त दे, चाहे ज़िल्लत, 
चाहे जिसे ईमान दे, चाहे लानत, 
समझाने बुझाने की मशक्क़त क्यों है? 
जब खुद तेरे ताबे में है सारी हिकमत . 

چاہے جسے عزت دے چاہے ذلّت 
چاہے جسے ایمان دے چاہے لعنت 
سمجھنے بجھانے کی مشققت کیوں ہو 
جب خود ترے تعبے میں ہے ساری حکمت ٠ 

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Wednesday, December 14, 2016

Junbishen 780

Rubaaiyan

आज़माइशें हुईं, क़रीना आया,
चैलेंज हुए क़ुबूल, जीना आया.
शम्स ओ क़मर की हुई पैमाइश, 
लफ्फ़ाज़ के दांतों पसीना आया

آزمائشیں ہوئیں ، قرینہ آیا 
چیلنج ہوئے قبول ، جینا آیا 
شمس اور قمر کی، ہوئی پیمائش 
لفاظی کے دانتوں کو، پسینہ آیا ٠ 


मुमकिन है कि माज़ी में ख़िरद गोठिल हो, 
समझाने ,समझने में बड़ी मुश्किल हो, 
कैसा है ज़ेहन अब जो समझ लेता है, 
मज़मून में मफ़हूम अगर मुह्मिल हो. 

ممکن ہے کہ ماضی میں، خرد گوٹھل ہو 
سمجهانے سمجھنے میں بڑی مشکل  ہو 
کیسا ہے ذھن، اب جو سمجھ لیتا ہے 
مضمون میں مفہوم اگر مہمل ہو ٠ 


ये ईश की बानी, ये निदा की बातें, 
आकाश से उतरी हुई ये सलवातें , 
इन्सां में जो नफ़रत की दराडें डालें, 
पाबन्दी लगे ज़प्त हों इनकी घातें. 

یہ ایش کی بانی ، یہ ندا کی گھاتیں  
آکاش سے اتری ہوئی یہ صلواتیں 
انسان میں نفرت کی دراڑیں ڈالیں 
پابندی لگے ، ضبط ہوں انکی باتیں٠ 

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Monday, December 12, 2016

Junbishen 774


रुबाईयाँ 
आज़माइशें हुईं, क़रीना आया,
चैलेंज हुए क़ुबूल, जीना आया.
शम्स ओ क़मर की हुई पैमाइश, 
लफ्फ़ाज़ के दांतों पसीना आया

آزمائشیں ہوئیں ، قرینہ آیا 
چیلنج ہوئے قبول ، جینا آیا 
شمس اور قمر کی، ہوئی پیمائش 
لفاظی کے دانتوں کو، پسینہ آیا ٠ 



मुमकिन है कि माज़ी में ख़िरद गोठिल हो, 
समझाने ,समझने में बड़ी मुश्किल हो, 
कैसा है ज़ेहन अब जो समझ लेता है, 
मज़मून में मफ़हूम अगर मुह्मिल हो. 

ممکن ہے کہ ماضی میں، خرد گوٹھل ہو 
سمجهانے سمجھنے میں بڑی مشکل  ہو 
کیسا ہے ذھن، اب جو سمجھ لیتا ہے 
مضمون میں مفہوم اگر مہمل ہو ٠ 



ये ईश की बानी, ये निदा की बातें, 
आकाश से उतरी हुई ये सलवातें , 
इन्सां में जो नफ़रत की दराडें डालें, 
पाबन्दी लगे ज़प्त हों इनकी घातें. 


یہ ایش کی بانی ، یہ ندا کی گھاتیں  
آکاش سے اتری ہوئی یہ صلواتیں 
انسان میں نفرت کی دراڑیں ڈالیں 
پابندی لگے ، ضبط ہوں انکی باتیں٠ 

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Friday, December 9, 2016

unbishen 774



रुबाईयाँ 

औरत को गलत समझे कि आराज़ी* है,
यह आप के ज़ेहनों में बुरा माज़ी है,
यह माँ भी, बहन बेटी भी, शोला भी है,
पूछो कि भला वह भी कहीं राज़ी है.
 *खेतियाँ 

عورت کو غلط سمجھے کہ آراضی ہے 
یہ آپ کے ذہنوں میں برا ماضی ہے
یہ ماں بھی ، بہن بھی،  شولہ بھی ہے 
پوچھو کہ کہیں وہ بھی بھلا راضی ہے 



क्यों तूने बनाया इन्हें बोदा यारब!
ज़ेहनों को छुए इनका अकीदा1 यारब,
पूजे जो कोई मूरत, काफ़िर ये कहें,
खुद क़बरी सनम2 पर करें सजदा यारब.
1- आस्था 2-मजारें 



کیوں تونے بنایا، انہیں بودا یا رب 
ذہنوں کو چھوے، ان کا عقیدہ یا رب 
پوجے جو کوئی مورت ، کافر یہ کہیں
خود قبری صنم کو، کریں سجدہ یا رب ٠




नन्हीं सी मेरी जान से जलते क्यों हो,
यारो मेरी पहचान से जलते क्यों हो,
तुम खुद ही किसी भेड़ की गुम शुदगी हो, 
मुंकिर को मिली शान से जलते क्यों हो. 

ننہیں سی مری جان سے، جلتے کیوں ہو 
یارو مری پہچان سے، جلتے کیوں ہو
تم خود ہی کسی بھیڑ کی، گم شدگی ہو 
 'منکر' کو ملی شان سے، جلتے کیوں ہو ٠

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Wednesday, December 7, 2016

Junbishen 776


Rubaiyan

है बात कोई गाड़ी यूँ चलती जाए ,
विज्ञान के युग में भी फिसलती जाए , 
ढ़ोती रहे सर पे , अवैज्ञानिक मिथ्या ,
पीढ़ी को लिए वहमों में ढलती जाए .

ہے بات کوئی گاڑی یوں چلتی جاۓ 
وگیان کے یگ میں بھی پھسلتی جاۓ 
ڈھوتی رہے سر پہ اویگیانک متھیا 
پیڑھی کو لئے وہموں میں ڈھلتی جے ٠ 



इक उम्र पे रुक जाए, जूँ बढ़ना क़द का,
कुछ लोगों में हश्र है, इसी तरह खिरद1 का,
मुजमिद2 खिरद को ढोते हैं सारी उम्र,
रहता है सदा पास मुसल्लत3 हद का.
1- बौधिक छमता 2-जमी हुई 3-थोपी हुई 

اک عمر میں روک جاۓ، جوں بڑھنا قد کا 
کچھ لوگوں میں حشر ہے ، اسی طرح خرد کا
منجمد خرد کو، ڈھوتے ہیں ساری عمر 
رہتا ہے صدا پاس، مسلّط حد کا 


कुछ रुक तो ज़माने को जगा दूं तो चलूँ,
मैं नींद के मारों को हिला दूं तो चलूँ,
ऐ मौत किसी मूज़ी को जप कर आजा,
सोई हुई उम्मत* को उठा दूं तो चलूँ.
*मुसलमानों  

کچھ رک تو، زمانے کو جگا دوں تو چلوں 
میں نیند کے ماروں کو، ہلا دوں تو چلوں 
ایے موت کسی موذی کو، جپ کر آ جا 
سوئی ہوئی امّت کو، جگا دوں تو چلوں ٠
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Monday, December 5, 2016

Junbishen 775



Rubaaiyan

तहरीक सदाक़त1 हो दिलों में पैदा ,
तबलीग़ जिसारत2 हो दिलों में पैदा ,
बतला दो ज़माने को खुद भी बुत है ,
फितरत3 की अक़ीदत4 हो दिलों में पैदा
१ सच्चै २ साहस ३ लौकिक ४ आस्था 
تحریک صداقت ہو دلوں میں پیدا 

تبلیغ جسارت ہو دلوں میں پیدا
بتلا دو زمانے کو ، خدا بھی بت ہے 
فطرت کی عقیدت ہو دلوں میں پیدا ٠ 



सौ बार करो गौर ग़लत तुम तो नहीं ,
हो जाए अगर अपने ख़यालों पे यकीं ,
कंजोर बनो और न मुआफ़ी मांगो ,
बकती रहे दुन्या , बुलाता फिरे दीं .

سو بار کرو غور ، غلط تم تو نہیں 
ہو جاۓ اگر اپنے خیالوں پہ یقیں
کمزور بنو اور نہ معافی مانگو 
بکتی پھرے دنیا ، بلاتا رہے دیں ٠



आज़ादी है सभी को कोई कुछ माने ,
अजदाद* के जोगी को पयम्बर जाने ,
या अपने कोई एक खुदा को गढ़ ले ,
गुस्ताखी है औरों को लगे समझाने .
*पूर्वज 

آزادی ہے سبھی کو کوئی کچھ مانے
اجداد کے جوگی کو پیمبر جانے 
آزاد ہے وہ اپنے خدا کو گڑھ لے 
گستاخ ہے آوروں کو لگے سمجھانے ٠ 

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