Sunday, March 10, 2019

जुंबिशें - - - ग़ज़ल खंडहरों मे नक़्श हैं



नज़्म 

शाज़िशी मुहिम 

खंडहरों मे नक़्श हैं माज़ी की शरारतें,
लूटने में लुट गई हैं ज़ुल्म की इमारतें.

देख लो सफ़ीर ए हज, उस सफ़र में क्या मिला,
थोड़ा सा सवाब था, ढेर सी हिक़ारतें1.

बात क़ायदे की है, अपने ही ज़ुबां में हो,
मज़हबी किताब की तूल तर इबारतें.

है अज़ाब ए जारिया2, ज़ालिमों की क़ौम पर,
मिट गईं तमुद्दनी3 शाख की ज़ियारतें.

क़ाफ़ला गुज़र गया, नक्श ए पा पे धूल है,  
पा सकी न रह गुज़र, सिद्क़4  की हरारतें.

शर्म सार है ख़ुदा, उम्मतों पे बोझ है,
शाज़िशी मुहिम वह थी, बेजा थीं जिसारतें5
.
1 घृणा 2 निरंतर श्राप 3 सभ्यता 4 सत्य 5 दु;साहस

تاریخی سانحے

 کھنڈ ہروں میں نقش ہیں ، ماضی کی شرارتیں
لوٹنے میں لٹ گئی ہیں ، ظلم کی عمارتیں ٠

دیکھ لو سفیرر تم ، سفر حج میں کیا ملا 
تھوڑا سا ثواب تھا ، ڈھیر سی حقارتیں ٠ 

بات قائدے  کی ہے ، اپنی ہی زباں میں ہو
مذہبی کتابوں کی ، تول تر عبارتیں ٠

ہے عذاب جاریہ ، ظالموں کی قوم پر 
مٹ گئیں تمدّنی ، نقش کی زیارتیں 

قافلہ گزر گیا ، نقش پا پہ  ہے 
پا سکیں نہ رہگزر ، صدق کی حرارتیں ٠

شرمسار ہے خدا، امتیں ذلیل ہیں 
سازشی مہم وہ تھی ، بے جا تھیں جسارتیں ٠ 

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