Wednesday, October 16, 2013

junbishen 88


नज़्म 
ईमान की कमज़ोरी

मेरा ईमान1 यक़ीनन, है अधूरा ही अभी,
बर्क़ रफ़्तार2 है, मशगूल ए सफ़र ,
हुक्म ए रब्बानी को, 
ख़ुद सुन के ये क़ायल होगा,
क़ुर्रा ए अर्ज़ ओ फ़िज़ा नाप चुका,
क़ुर्रा ए बाद के, काँधों पे चढा,
शम्सी हलक़ो से बढ़ गया आगे,
डेरा डाले है ख़लाओं में अभी,

रौशनी साल१० से भी तेज़ क़दम,
सर पे तकमील११ की शिद्दत१२ को लिए,
है बड़े अज़्म१३ से सर-गर्म ए सफ़र,
पाने वाला है, ख़ुदाओं का पता,
मैं भी कह पाऊँगा, ईमान के साथ,
मेरा ईमान भी मुकम्मल है।

मेरा ईमान यक़ीनन, है अधूरा ही अभी,
बर्क रफ़्तार है, मशगूले-सफर,

मैं क़यासों१४ के मनाज़िल१५ पे, नहीं ठहरूंगा,
हार मानूंगा नहीं, हद्दे-ख़ेरद१६ के आगे,
आतिशे-जुस्तुजू१७ में जलता हुवा,
पैकरे-शाहिदी१८ में ढलता हुवा,
हर्फ़ ए आखीर१९ को लिखूंगा मैं,
हक़ को पाने की क़सम खाई है,

चाँद तारों पे वजू२० करते हुए,
अर्शे-आला२१ पे पहुँच जाऊंगा,
देखना है कहाँ छुपा है 'वह',
उससे थोडी सी गुफ़्तुगू होगी,

मौज़ूअ, यह फ़लक़ी२३ 'डाकिए' होंगे,
उनके पैग़ाम पर जिरह होगी,
लेके ईमान ए ज़मीं लौटूंगा,
मेरा ईमान यक़ीनन है अधूरा ही अभी,
इसकी तकमील२४ मेरी मंज़िल है।।

१-धार्मिक-विश्वाश २-विद्युत् गति ३-यात्रा-रत ४-ईशादेश ५-मान्य ६-धरती एवं छितिज मंडल ७-वायु मंडल ८-सौर्य-मंडल ९-ब्राम्हाण्ड १०-प्रकाश वर्ष ११-परिपूर्णता १२-आतुरता १३-उत्साह १४-अनुमान १५ -मंजिलें१६-बुद्धि-सीमा १७-खोज की गरिमा १८-साक्छी-रूप १९-आखरी लेख २०-नमाज़ से पहले मुंह धोना २१-बड़ा आकाश २२-विषय २३-आसमानी पैगम्बर २४-परिपूर्णता

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (18-10-2013) "मैं तो यूँ ही बुनता हूँ (चर्चा मंचःअंक-1402) पर भी होगी!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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