Sunday, January 26, 2014

junbishen 137



मुस्कुराहटें 
जुरवा कहिस

भ्रमित हव्यो गयो, भ्रमण करिके,
चार धाम हव्यो आएव ।
माँगा, बाँटा अउर परोसा,
ज्ञान सभै लै आएव।
जोड़ा गांठा धेला पैसा,
पनडन का दै आएव,
दइव रहा मन तुम्हरे बैठा,
ओह पर न पतियाएव।

2 comments:

  1. भाँवर होई गयो भँवर भँवर कै..,
    चारीं धाम होई आयो..,
    माँगा बाँटा और परोस्सा..,
    ज्ञान सभा मैं गायो..,
    जोड़ा गांठा कौड़ी धेल्ला..,
    पण्डे दै बाहर बिठायो..,
    देव रहा मन तुम्हरे बैठा..,
    ओह पर ना पतियायो.....

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