Monday, May 9, 2016

unbishen 786



ग़ज़ल

जितना बड़ा है क़द तेरा, उतना अज़ीम है,
ऐ पेड़! तू भी राम है, तू भी रहीम है.

ईमान दार लोगों के, ज़ानों पे रख के सर,
बे खटके सो रहे हो, ये अक़्ले सलीम है.

तेरह दिलों की धड़कनें, तेरह दलों का बल,
जम्हूर का मरज़ ये, वबाल ए हकीम है.

अलक़ाब में आदाब के, अम्बार मत लगा,
बालाए ताक कर इसे, क़द्रे क़दीम है.

खूं का लिखा हुवा, मेरा दिल में उतार लो,
ये आसमानी कुन, न अलिफ़,लाम, मीम है.

'मुंकिर' खिला रहा है, जो कडुई सी गोलियां,
इंकार की दवा है, ये तासीर नीम है.
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غزل

جتنا بڑا ہے پیڑ، تو اتنا عظیم ہے
اے پیڑ تو بھی رام ہے ، تو بھی رحیم ہے ٠ 

ایمان دار لوگوں کے، زانو پہ رکھ کے سر 
بے کھٹکے سو رھے ہو ، یہ عقل سلیم ہے ٠ 

تیرہ دلوں کی دھڑکنیں ، تیرہ دلوں کا بل 
جمہور کا مرض ، یہ وبال حکیم ہے ٠ 

القاب میں ادب کے یہ انبار مت اٹھا 
بالاۓ طاق کر اسے ، قدر قدیم ہے ٠ 

خوں سے لکھا ہوا مرا ، دل میں اتار لو 
یہ آئیں بایں شایں ، نہ الف لام میم ہے ٠ 

منکر کھلا رہا ہے جو کڑوی سی گولیاں
انکار کی دو ہے ، تاثیر نیم ہے ٠

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2 comments:

  1. आप ग़ज़ल बहुत अच्छे लिखते हैं, ग़ज़ल में प्रयुक्त उर्दू शब्दों का हिंदी अनुवाद अगर फुट नोट में लिख दें तो हिन्दी पाठकों को समझने में आसानी होगी |

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 11 मई 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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