Thursday, January 8, 2015

Deewan 53 Ghazal



4 comments:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (10-01-2015) को "ख़बरची और ख़बर" (चर्चा-1854) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. इसको उस दस्तो-सहरा में छोड़ आओ..,
    जहाँ जब्र ज़ुल्म से जम्हूरी ज़कात मिले.....

    जम्हूरी ज़कात = मतदान, टैक्स, घूस

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  3. इसको उस दस्तो-सहरा में छोड़ आओ..,
    जहाँ जब्र ज़ुल्म से जम्हूरी ज़कात मिले.....

    क्योंकि ये सब कुछ तो वहीँ मिलता है

    जम्हूरी ज़कात = मतदान, टैक्स, घूस

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