Sunday, May 6, 2018

जुंबिशें - - -ग़ज़ल 51 कौन आमादा ए फ़ना होगा,


51

कौन आमादा ए फ़ना होगा,
कोई चारा न रह गया होगा.

लूट लूँ सोचता हूँ ख़ुद को मैं,
लूट लें दूसरे, बुरा होगा.

एडियाँ जूतियों की ऊँची थीं,
क़द बढ़ाने में गिर गया होगा.

दे रहे हो ख़बर क़यामत की,
कान में तिनका चुभ गया होगा.

अब तो तबलीग़ वह चराता है,
पहले तबलीग़ को चरा होगा.

दफ़अतन वह उरूज3 पर आया,
ई पामाल4 हो गया होगा.

मेरे बच्चे हैं कामयाब सभी,
मेरे आमाल का सिलह होगा.

आँखें राहों पे थीं बिछी 'मुंकिर',
किस तरह माहे-रू चला होगा.

१-धर्म प्रचार २-अचानक ३-शिखर ४-मलियामेट

***

،کون آمادہء  فنا ہوگا 
کوئی چارہ نہ رہ گیا ہوگا٠ 

،لوٹ لوں، سوچتا ہوں خود کو میں 
لوٹ لیں دوسرے، بُرا ہوگا٠ 

،ایڑیاں جوتیوں کی اونچی تھیں 
قد بڑھا نے میں گِر گیا ہوگا٠ 

،دے رہے ہو خبر قیامت کی 
کان میں تنکہ چُبھ گیا ہوگا٠ 

،اب تو تبلیغ وہ چراتا ہے، 
پہلے تبلیغ کو چرا ہوگا٠ 

،وہ دُعاؤں میں اشک بار ہوئے 
گڑ گڑانے میں کُچھ چھپا ہوگا٠ 

،دفعتاً وہ عروج پر آیا 
کوئی پامال ہو گیا ہوگا٠ 

،میرے بچے ہیں کامیاب سبھی 
میرے اعمال کا صلہ ہوگا٠

،آنکھیں راہوں میں بچھی تھیں منکر 
کِس طرح ماہرو چلا ہوگا٠ 

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