Tuesday, July 15, 2014

Junbishen 314


मुस्कुराहटें 
मुहाविरों के बोल 

कुछ पाना, कुछ खोते रहना ,
तुम बस, रोते धोते रहना .

फूल की सेजें खोते रहना , 
राह में कांटे बोते रहना .

जो बोले दरवाज़ा खोले ,
जागे हो तो सोते रहना .

नौ मन तेल पे राधा नाचे ,
तेली बैल को जोते रहना .

आँख के अंधे नाम नयन सुख ,
सूरदास सब टोते रहना .

धोबी के कुत्ते मत बनना ,
घर के घाट के होते रहना .

भैंस है उसकी जिसकी लाठी ,
पाप की गठरी ढोते रहना .

नाच न आवे आँगन टेढ़ा , 
पीर की तीर चुभोते रहना .

भाग की रोटी जुरवा खाए ,
मुनकिर रूप को रोते रहना .

Sunday, July 13, 2014

Junbishen 313


गज़ल

तू है रुक्न अंजुमन का, तेरी अपनी एक ख़ू है,
मैं अलग हूँ अंजुमन से, मेरा अपना रंग ओ बू है.

वतो इज़ज़ो मन तोशाए, वतो ज़िल्लो मन तोशाए,
जो था शर पे, सुर्ख़ रू है, बेक़ुसूर ज़र्द रू है.

तेरा दीं सुना सुनाया, है मिला लिखा लिखाया,
मेरे ज़ेहन की इबारत, मेरी अपनी जुस्तुजू है.

मुझे खौफ है ख़ुदा का, न ही एहतियात ए शैतान,
नहीं खौफ दोज़खों का, न बेहिश्त आरज़ू है.

वोह नहीं पसंद करते, जो हैं सर्द मुल्क वाले,
तेरी जन्नतों के नीचे, वो जो बहती अब ए जू है.

तेरे ध्यान की ये डुबकी, है सरल बहुत ही जोगी ,
कि बहुत सी भंग पी लूँ ,तो ये पाऊँ तू ही तू है.
*****
* वतो इज़जो मन तोशाए, वतो ज़िल्लो मन तोशाए=खुदा जिसको चाहे इज्ज़त दे,जिसको काहे जिल्लत.

Friday, July 11, 2014

Junbishen 312


गज़ल

आलम ए गुम की चीज़ होती है,
जान कितनी अज़ीज़ होती है.

अच्छा शौहर गुलाम होता है,
अच्छी बीवी कनीज़ होती है.

बात बिगडे तो जाए रुसवाई,
बात बन कर तमीज़ होती है.

मुफ़्त का मॉल खाने वालों की,
खाल कितनी दबीज़ होती है.

फिल्म बे दाग़ रहनुमाओं की ,
देखिए कब रिलीज़ होती है.

बे ख़याली में लम्स की बोटी,
हाय कितनी लज़ीज़ होती है.

*****
*कनीज़=दासी * दबीज़=मोटी*लम्स=स्पर्श


Tuesday, July 8, 2014

Junbishen 311


गज़ल

नई सी सिंफ़े सुख़न1 हो, नेअम2 की बात करो,
न झूट सच की, खुशी की, न ग़म की बात करो।

न बैठ जाना कि मसनद3 है, सुलह कुल4 की ये,
खड़े खड़े ही, दिलेरी की दम की बात करो।

उतार आओ अक़ीदत को, साथ जूतों के,
हमारी बज़्म में, हक़ की, धर्म की बात करो।

मुआमला है, करोड़ों की जिंदगी का ये,
सियासतों के खिलाड़ी, न बम की बात करो।

सभी असासा5 वतन का है, हस्बे नव आईन6,
अमीन कौन है, इस पर भरम की बात करो।

ये चाहते हो, हमा तन ही गोश 7हो जाएँ,
हों उलझे गेसुए अरज़ी8, अदम9 की बात करो।

तलाशे सिद्क़े ख़ला10 कितने मक़नातैशी11 हैं,
न अब जनाब ख़ुदा की, सनम की बात करो।

बहुत ही खून पिए जा रहे हैं, ये "मुंकिर"
क़सम है तुम को, जो दैरो हरम12 की बात करो।

१-काव्य-विधा २-नई बात ३-कुर्सी ४-सम्पूर्ण-संधि ५-पूँजी ६-नया संविधान ७-शरीर का कान बन जाना ८-धरती की लटें  ९-अनिस्तत्व --क्षितिजि-सच्चाई ११-चुम्बकीय १२-मंदिरों-मस्जिद

Monday, July 7, 2014

Junbishen 310



नज़्म 

कारसेवा 

कार सेवा है कि गुरु द्वारे जा ,
झूटे बर्तन की सफ़ाई कर दे ,
फर्श गन्दा हो , लगा दे पोछा ,
काम को मांगे रसोई जाके ,
कार सेवा है इबादत से सिवा .

कार सेवा को हथौड़ों से किया,
बेलचे और कुदालों से किया ,
करके मिस्मार एक मस्जिद को ,
कार सेवा को गुनाहों से किय. 

कार सेवा है कि आँखें बरसें ,
नाम कुछ और इसे दे डालो ,
कार सेवा को यूँ रुसवा न करो,
कार सेवा है मुक़द्दस हरकत ,
कार सेवा है खुदाई खिदमत .

Thursday, July 3, 2014

Junbishen 309



नज़्म 

कर्ब ए तन्हाई 

तू भी चल उस सम्त, जिस पर ये ज़माना है रवां ,
वर्ना छुट जाएगा 'मुंकिर' तुझ से तेरा कारवां .
अपने धुन की बोझ लेकर, तनहा तू रह जाएगा ,
इन्किशाफ़ ऍ राज़ ऍ हस्ती किस पे तू झलकाएगा .
क्यों गुरेज़ाँ है जहाँ, खुद अपनी ही तकमील से ,
क्यों झुसस जाती है दुन्या, सच की इक क़िनदील से .
नव अज़ाँ  का सिलसिला, लेता है क्यों मुद्दत तवील ,
सौ सफ़र में रख के क्यों, आता है अगला संग ए मील .
ज़ेहन कैसे हम सफ़र हों , इरतेक़ाई चाल के ,
मुज़्तरिब फ़ितरत को हैं, हर लम्हा सौ सौ साल के. 
इंतज़ार इ वक़्त बन, वह दिन यक़ीनन आएगा ,
मज़हबों के इस जुनूँ से, आदमी थर्राएगा .

Tuesday, July 1, 2014

Junbishen 308

रूबाइयाँ 

बेचैन सा रहता भरी महफ़िल में,
है कौन छिपा बैठा, तड़पते दिल में,
रहती हैं ये आखें, मतलाशी किसकी ?
मंजिल है कहाँ, कौन निहाँ मंजिल में.


धरती के हैं, धरती की रज़ा रखते हैं,
हक धरती का हर रोज़ अदा करते हैं,
वह चाहने वाले हैं फ़लक के 'मुंकिर',
ऊपर की दुआओं में लगे रहते हैं.


तस्बीह, तसवीर, मसाजिद, तोगरा,
एक्सपोर्ट करे चीन, खरीदे मक्का,
सीने से लगाए हैं इन्हें हाजी जी,
बेदीनों के तिकड़म का यह दीनी तुक्का.