Thursday, December 13, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 6


ध्यान का ज्ञान 

इक ध्यानी ध्यान में था, डूबा विधान में था,
इच्छा थी उसको पाऊँ, फिर दुनिया को दिखाऊँ.
लेकिन बड़ी थी मुश्किल, होना ये ग़र्क ए कामिल. 
कोई विचार आता, प्रयत्न टूट जाता.
उसने गुरु बनाया, जो उसके काम आया.

गुरुवर ने दक्षिना ली, भंग उसको फिर पिला दी.
उसको नशा जो आया, धीरे से खिलखिलाया.
बोला गुरु, मिला कुछ ? "हाँ और भी पिला कुछ"
जब पूरी चढ़ गई भंग, शागिर्द रह गया दंग.
प्रसाद गुड का खाता, लड्डू के मज़े पाता.

उठ कर वह नाच जाता, फिर तालियाँ बजाता.
जिसको वो ध्यान करता, वह सामने गुज़रता.
भगवान् पा चुका था, मुक्ति कमा चुका था.
ग़र्क ए कामिल -पूरी तरह डूबना 

 دھیان کا گیان 

اک گیانی گیان میں تھا ، ڈوبا ندان میں تھا 
اچھا تھی اسکو پاؤں ، پھر دنیا کو دکھاؤں 

لیکن بڑی تھی مشکل ، ہونا یہ غرق کامل 
کوئی وچار آتا ، پریتن ٹوٹ جاتا 

اسنے گرو بنایا ، جو اسکے کام آیا 
گرو ور نے دکچھنا لی ، بھنگ اسکو پھر پلا دی 

اسکو نشہ جو آیا ، دھیرے سے کھلکھلایا
جب پوری چڑھ گئی بھنگ ، شاگرد رہ گیا دنگ 

پرساد گڑ کا کھاتا  ، لدڈو کا مزہ پاتا
اٹھ کر وہ ناچ جاتا ، پھر تالیاں بجاتا 

جسکو وہ دھیان کرتا ، وہ سامنے گزرتا 
بھگوان پا چکا تھا ، مکتی کما چکا تھا٠ 

Wednesday, December 12, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 5


बैटिंग ----

क्या बात है, अकेले ही 'मुंकिर' खड़े हो तुम?
लगता है इस समाज से कस के लड़े हो तुम.

तफ़सीर1,तर्जुमा2 कि हो तारीख, चट चुके,
जितने ज़मीं से निकले हो उतने गडे़ हो तुम.

इब्लीस3 की तरह ही, ख़ुदी के नशे में हो,
आदम की वल्दियत है, ये किस पे पड़े हो तुम?

मज़हब हैं ग्यारह, बारह किसी पर तो पसीजो,
दिल नर्म है, दिमाग़ से कितने कड़े हो तुम.

कैच

लोगो ये कायनात4 तग़य्युर पजीर5 है,
सदियों पुरानी रस्मे-कुहन6 पर अडे़ हो तुम.

ख़ुद अपनी रहनुमाई के क़ाबिल नहीं हुए?
कब तक रहोगे गोद में? जल्दी बड़े हो तुम.

१-ब्याख्या २-अनुवाद ३-बड़ा शैतान ४-ब्रम्हांड ५-परिवर्तन शील ६-पुराणी रस्में

بیٹنگ

کیا بات ہے ، اکیلے ہی 'منکر' کھڑے ہو تم
لگتا ہے اس سماج سے ، کس کے لڑے ہو تُم٠ 
تفسیر و ترجمہ کہ ہو تاریخ ، چٹ چکے 
جتنے زمیں سے نکلے ہو ، اتنے گڑے ہو تم ٠ 
ابلیس کی طرح ہی ، خودی کے نشے میں ہو 
آدم کی ولدیت مگر ، کس پہ پڑے ہو تم ٠ 
مذہب ہیں چار پانچ ، کسی پر پسیج جاؤ 
دل نرم ہے ، دماغ کے کتنے کڑے ہو تم ٠ 

اور کیچ 

لوگو ! یہ کاینات تغیّر پذیر ہے 
صدیوں پرانی رسم کہن پر اڑے ہو تم 
خود اپنی رہنمائی کے قابل نہیں ہوئے ؟
کب رہوگے گود میں ،جلدی بڑے ہو تم ٠ 

Tuesday, December 11, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 4


दोहा-तीहा-चौहा
दोहा

 तुलसी बाबा की कथा, है धारा प्रवाह, 
राम लखन के काल के, जैसे होएँ गवाह. 

तीहा

हे दो मन की बालिके ! देहे पर दे ध्यान,
चलत, फिरत, डोलत तुझे, पल पल होत थकान,
पर मुँह ढोवे न थके, तन यह बैल समान.

चौहा

सात नवाँ तिरसठ भया, तीन औ छ चुचलाएँ,
तीन नवाँ छत्तीस हुआ, तीन औ छ टकराएँ,
छत्तीस का यह आकड़ा, अकड़े बीच बजार,
तिरसठ की है आकडी , गलचुम्मी कर जाएँ.

دوہا  --تیہا ---چوہا 

دوہا

تلسی بابا کی کتھا، ہے دھارا پرواہ 
رام لکھن کے کال کے، جیسے ہویں گواہ٠  

تیہا

ہے دو من کی بالیکے ! دے دیہے پر دھیان 
چلت پھرت ڈولت تجھے پل پل ہوت تکان 
پر منہ ڈھووت نہ تھکے ، تن یہ دھول سمان٠  

چوہا
سات نواں ترسٹھ بھیا ، تین اور چھہ چچلأیں 
تین نواں چھتیس ہوا ، تین اور چھہ ٹکرایں 
 چھتیس کا یہ آکڑا ، اکڑیں بیچ بزار 
ترسٹھ کی ہے آکڑی ، گلچممی کر جاین٠ 

Monday, December 10, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 3



साझेदारी 

फ़न का माहिर हूँ ज़ात1 रखता हूँ,
मैं उरूज़ी2 बिसात रखता हूँ,
बस कि आवाज़ ही नहीं पाई,
तुम में मूसूक़ी3 है मेरे भाई.

आओ ग़जलों का कारोबार करें,
अपनी ग़ुरबत4 को शर्म सार,
दाल रोटी का कुछ सहारा हो,
ग़ज़लें मेरी गला तुम्हारा हो,
आधे आधे की हिस्से दारी हो,
मैं हूँ शायर कि तुम मदारी हो. 

1 हस्ती 2 शायरी व्याकरण 3 संगीत 4 दरिद्द्रता 

ساجھیداری 

فن کا ماہر ہوں ، ذات رکھتا ہوں 
میں عروضی بساط رکھتا ہوں 
بس کہ آواز ہی نہیں پائی 
تم میں موسوقیت ہے ائے بھائی 

آ و غزلوں کا کاروبار کریں 
اپنی غربت کو شرم سار کریں 
دال روٹی کا کچھ سہارا ہو 
غزلیں میری ، گلا تمہارا ہو 
تم اپنے نام سے میرا کلام پڑھتے رہو .
میری روحوں پہ راگ مڑھتے رہو 
آدھے آدھے کی حصّے داری ہو
 ہم ہیں شائر کہ تم مداری ہو ٠ 

Sunday, December 9, 2018

जुंबिशें - - - मुस्कुराहटें 2


सफ़ैद झूट 

दाढ़ी है सन सफ़ैद औ मोछा सफ़ैद है,
धोती निरी  सफ़ैद औ कुरता सफ़ैद है,
नेता की टोपी जूता औ मोज़ा सफ़ैद है,
देख सखी झूट औ कितना  सफ़ैद है.

سفید جھوٹ 

داڑھی ہے سن سفید، او موچھا سفید ہے 
دھوتی نری سفید، او کرتا سفید ہے  
نیتا کی ٹوپی، جوتا و موجہ سفید ہے 
دیکھ سکھی ! جھوٹ، او کتنا سفید ہے ٠ 

muskurahten 1


muskurahten 


डर डरा डर डर, डर डर डर 

है बाढ़ का, क़हत का, बड़े ज़लज़ला का डर,
पर्यावरण से दूषित, आबो-हवा का डर,
है कैंसर से, एड्स से, सब को फ़ना का डर,
राहों पे चलते फिरते, किसी हादसा का डर,
साँपों का, बिछुओं का, मुए भेड़िया का डर,
नेता, पुलिस, लुटेरे, गुरू, माफ़िया का डर,
इन सब से बच बचा के भी, बाकी बचा डर, 
शैतान, भूत, जिन्न ओ मलायक, खुदा का डर. 

ڈر ڈرا ڈر، ڈرڈرڈر 

ہے باڑھ کا ، قحط کا ، بڑے زلزلہ کا ڈر 
آلودگی میں ڈوبی ہوئی ، اب و ہوا کا ڈر 
ہے کینسر سے ، ایڈس سے، برھتی قضا کا ڈر 
راہوں پہ چلتے پھرتے ، کسی حادثہ کا دار 
سانپوں کا ،بچھوؤں کا ، موے بھیڑیا کا ڈر 
نیتا ، پولیس ، لٹیرے ، گرو ، مافیہ کا ڈر 
ان سب سے بچ بچا کے، ابھی باقی بچا ہے 
شیطان و بھوت و جن و ملایک ، خدا کا ڈر ٠ 
*

Saturday, December 8, 2018

जुंबिशें - - - क़तआत 37-39



37
प्रेत आत्माएं

जेब में कुछ ले के आए हो कि बस दर्शन किया,
मैं हूँ मर्यादा पुरूष, है मूल्य मेरा रूपया,
तुम ने ही जन्मा है हम को, नाम ज्ञानेश्वर दिया,
जी रहा हूँ ऐश से ऐ बेवकूफ़ो! शुक्रया.

پریت آتما ئیں 
جیب میں کُچھ لے کے آے ہو ، کہ بس درشن کیا 
میں ہوں مریادہ پُرش ، ہے مولیہ میرا روپیہ 
تُم نے ہی جنما ہے مُجھ کو ، نام گیانیشور دیا 
جی رہا ہوں عیش سے ، ائے بے وقوفو ! شکریہ ٠

38
प्रशंशनीय 

प्रदर्शनी प्रकृति की, नहीं पूजनीय है,
ये आपदा, विपदा भी, नहीं निंदनीय है,
भगवान् या शैतान नहीं होती है क़ुदरत,
जो कुछ मिला है उससे, वह प्रशंशनीय.

39 
जल परी 

शाम आई भर नहीं, ऊबने लगता है दिल,
जाने क्यों गुम सी ख़बर, ढूँढने लगता है दिल,
याद आती है उसे तब, खूबसूरत जल परी,
जाके पैमाने में फिर, डूबने लगता है दिल.

جل پری 

شام آئ بھر نہیں کہ اوبنے لگتا ہے دل 
جانے کیوں گم سی خبر کو ڈھونڈھنے لگتا ہے دل 
یاد آتی ہے اسے تب خوب صورت جل پری  
جا کے پیمانے میں پھر ڈوبنے لگتا ہے دل٠